Type Here to Get Search Results !

संसद में महंगाई और बेरोजगारी पर गरमाई बहस

बजट सत्र के दौरान संसद में हंगामा, महंगाई और बेरोजगारी पर विशेष चर्चा जारी

आज संसद के मौजूदा सत्र में महंगाई और बेरोजगारी को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में विपक्ष ने सरकार पर आम जनता की परेशानियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने अपने विकास कार्यों और योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा पेश किया।

लोकसभा में विपक्ष ने विशेष ध्यान देने की मांग करते हुए कहा कि रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम नागरिक परेशान हैं। इसके अलावा, बेरोजगारी बढ़ रही है और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हो गए हैं। विपक्ष ने कहा कि सरकार को तात्कालिक राहत उपाय पेश करने चाहिए।

सरकार ने जवाब में कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था स्थिर है और कई आर्थिक सुधारों पर काम चल रहा है। वित्तीय और औद्योगिक नीतियों के जरिए रोजगार सृजन और विकास पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल में छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की थी, जिससे युवाओं को नए रोजगार मिल सकें।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सत्र आने वाले नीतिगत फैसलों और बजट से संबंधित विधेयकों के लिए महत्वपूर्ण होगा। सरकार के कदमों का असर सीधे आम जनता पर पड़ सकता है। यदि महंगाई और बेरोजगारी पर तत्काल नियंत्रण नहीं किया गया, तो सामाजिक और आर्थिक असंतोष बढ़ सकता है।

संसद के हंगामे के दौरान कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी, लेकिन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा जारी रही। युवाओं और छात्र वर्ग को भी रोजगार, कौशल विकास और शिक्षा में सुधार के लिए ध्यान देना आवश्यक है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि नए उद्योगों और तकनीकी स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि बेरोजगारी में कमी आए और आर्थिक विकास को गति मिले।

आम जनता ने सोशल मीडिया और स्थानीय रिपोर्ट्स के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने महंगाई पर चिंता व्यक्त की और बेरोजगारी से जुड़ी परेशानियों के समाधान की मांग की। सरकार ने आश्वासन दिया कि आगामी हफ्तों में नई योजनाएं और वित्तीय पैकेज पेश किए जाएंगे।

इस सत्र का महत्व इसलिए भी है क्योंकि कई प्रस्ताव और नीतिगत बदलाव ऐसे हैं, जिनका असर सीधे युवाओं, मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सत्र के दौरान बजट और आर्थिक सुधारों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Shorts

Video